“न हाथ थाम सके, न पकड़ सके दामन
बड़े क़रीब से उठकर चला गया कोई।”
फ़िल्मों की समझ मुकम्मल होने से काफ़ी पहले ही मीना कुमारी जी मुझ पर अलग छाप छोड़ चुकी थी। पिताजी फ़िल्मों के शौकीन थे। दूरदर्शन के ज़माने में जब उनकी पसंद की फ़िल्में दिखाई जाती तो खुलकर उसके बारे में बताया करते थे। और फ़िल्मों को समझने की बुनियाद ऐसे ही पड़ी। फिर वक़्त के साथ इसमें नई कड़ियां जुड़ती गईं, कई बातें मिटती गईं। लेकिन मीना जी की अदाकारी मेरी उम्र के साथ और संजीदा होती चली गई। उम्र और एहसास दोनों जो गहरे होते जा रहे थे। लेकिन इस दौरान भी मुझे इल्म न था कि मीना जी एक बेहतरीन शायर भी थीं। और उनकी शायरी में भी वही दर्द था जो इस अदाकारा के किरदार में था। कहती रहीं:
“टुकड़े-टुकड़े दिन बीता,
धज्जी-धज्जी रात मिली।
जिसका जितना आंचल था,
उतनी ही सौग़ात मिली।।
जब चाहा दिल को समझें,
हंसने की आवाज़ सुनी।
जैसे कोई कहता है, लो
फिर तुमको अब मात मिली।।
बातें कैसी? घातें क्या?
चलते रहना आठ पहर।
दिल-सा साथी जब पाया,
बेचैनी भी साथ मिली।।”
मीना जी के लिए हर लम्हा आग़ाज़ था। उन्हीं के शब्दों में :
“आग़ाज़ तो होता है, अंजाम नहीं होता,
जब मेरी कहानी में वह नाम नहीं होता।
जब ज़ुल्फ़ की कालिख में गुम हो जाएगा राही,
बदनाम सही, लेकिन, गुमनाम नहीं होता!
हंस-हंस के जवां दिल के हम क्यों ने चुनें टुकड़े?
हर शख़्स की क़िस्मत में ईनाम नहीं होता।”
कई और नज़्म और ग़ज़लें हैं जो आगे भी मैं आपके सामने पेश करता रहूंगा।





अभी पिछले दिनों साहिब बीवी और गुलाम देखी।
मीना जी का अभिनय जितनी गहरायी लिये होता है, आप केवल सन्न से देखते रह जाते हैं।
उन्हे हमेशा रोल और डायरेक्टर भी बढ़िया मिले। उनसा कलाकार कोई दूसरा नहीं हो सकता।
भाई वाह अच्छी लगी आपकी बाते,और इसी तरह नज़्म और गज़ल से नवाज़ते रहियेगा.मीना कुमारी का हमेशा से मै प्रशसक रहा हू.माफ़ी चाह्ता हू जो टाइप की अशुध्धिया मै सुधरने की स्थिती मे नही हू..
meena kumaari meri bahut fvt hai ..achha laga unke baare main padhna ….
मीना कुमारी की एक गजल शाम तन्हा ….. अगर आप के पास हो तो जरूर लिखे और अगर ऑडियो हो तो क्या बात है।
टुकड़े टुकड़े दिन बीता…. मीना कुमारी की लिखी हुई मेरी पसंदीदा नज्म है ।मीना कुमारी जी गुलजार के भी बेहद करीब थीं और इस दुनिया से रुखसत होने के पहले उन्हें अपनी कई कृतियाँ भेंट कर गई थीं ।
बहुत सुंदर.. बधाई..
मीना कुमारी की ग़ज़लें यहां सुनें
http://www.musicindiaonline.com/music/ghazals/m/artist.1556/
meena kumari ji ki kai filmen dekhi hain ,unhonen kabhi koi abhinay kiya hi nahin balki kirdaron ko jiya hai.unki shakhsiyat ka ye pehloo,shayari ye nahi pata tha.isse avgat karane ke liye dhanyawaad.
Meena Kumari ji bauth hi khubsurat adakara thi unki jaise koi adakara na hai na hogi aur unki jaise nashale aakhe na kisi ki hai aur na hi kabhi ho sakti hai unki aakho me jadoo tha jisse yo sabhi ka dil jeet lete thi