ये सिलेब्रिटी भी अजीब चीज़ होता है। उसकी ज़िंदगी, उसकी हरकतों को अगर समझने की कोशिश करें तो ये बेहद बेईमान और झूठे क़िस्म की जमात दिख पड़ता है। ये कोई मेरा पूर्वाग्रह नहीं है। और ना ही मुझे इन सिलेब्रिटीज़ की ज़िंदगी में कोई दिलचस्पी है। लेकिन ये लोग गाहे-बगाहे धमाका ही कुछ ऐसा कर जाते हैं कि जब तक आप संभले आपके दिमाग़ में कई जानकारियां छोड़ जाते हैं।
मैंने तो सोचा था कि बिग ब्रदर से शिल्पा शेट्टी ने इतनी शोहरत बटोर ली है कि अब उन्हें किसी ऐसे शो की ज़रूरत ही ना पड़े। लेकिन वो फिर सुर्ख़ियों में हैं। वजह भी निकल आया।
एक बार फिर कुछ ऐसा हो गया कि जिसने देखा मुंह ताकता रह गया। और जो हुआ उस पर बिग ब्रदर शो की तरह ही शिल्पा ने तुरंत प्रतिक्रिया भी दे दी। कहा, ये कुछ ज्यादा ही हो गया। हालांकि शिल्पा के चेहरे पर मुस्कान बनाए रखने की जद्दोजहद और असमंजस की लकीरों से भी ये ज़ाहिर था। लोगों ने सोचा शाम तक रिचर्ड गेयर मीडिया से रूबरु होकर अपनी ग़लती मान लेंगे। कह देंगे कि अति उत्साह में मैं बहक गया। और शिल्पा भी इसे ऐसा ही मान लेंगी।
लेकिन हुआ फिर वही जो ब्रिटेन के उस शो में हुआ था। (जैसे पूरी दुनिया के सामने जेड गुडी के बयान को नस्लीय बता कर अगले ही दिन शिल्पा का हृदय परिवर्तन हो गया, ठीक वैसे ही) शिल्पा फिर दूसरे करवट बैठ गईं। उनका कायाकल्प रिचर्ड की बेहूदा हरकत की तरह ही चौंकाने वाला था। पूरी दुनिया के सामने पेश आए एक आपत्तिजनक वाकये को शिल्पा ने निजी मामला बताकर रफ़ा-दफ़ा कर दिया। अब लोगों की नाराज़गी को वो तांकझांक जैसा बता रहीं थी। कहा, जब मुझे किसी बात पर आपत्ति नहीं तो आपको क्यों, रिचर्ड ने कौन सी बड़ी ग़लती कर दी? तो, क्या दो लोगों की रज़ामंदी होने से उन्हें आपस में कहीं कुछ भी करने की आज़ादी हासिल हो जाती है? कहती हैं होठों पर तो नहीं चूमा रिचर्ड ने? मतलब होठों पर चूमते तो लोगों का ऐतराज़ वाजिब हो जाता। सवाल करती हैं अच्छा खासा कार्यक्रम था, कार्यक्रम का एक सामाजिक सरोकार था लेकिन मीडिया को सिर्फ चुंबन ही दिखा? अरे भई, किसने छुपाया कि आप, सन्नी देओल और रिचर्ड गेयर एड्स के बारे में ट्रक ड्राइवरों को जागरूक करने गईं थी।
शिल्पा की नाराज़गी अभी ख़त्म नहीं हुई थी। लगे हाथों खुलासा कर दिया कि रिचर्ड गेयर ने उस घटना के बाद उनसे माफ़ी भी मांगी और इससे वो काफ़ी शर्मिंदा हुईं। वाह। और हों भी क्यों ना, रिचर्ड की शैल वी डांस के पोज़ को वो थोड़ी देर के लिए ग़लत जो समझ बैठी थीं। माफ़ी की क्या ज़रूरत थी, रिचर्ड?
शिल्पा प्रवचन यहीं नहीं रुका। शिल्पा ने इसी बहाने हमारे लिए भारतीय संस्कृति की व्याख्या भी की। हमारी आंखें खोल दी। कहती
हैं रिचर्ड ने एड्स के लिए कार्यक्रम को स्पॉन्सर किया था, उसकी नीयत नहीं दिखी आपको? ये लो, तो हमने कब रिचर्ड गेयर के भारत के घुसते ही वापस जाओ का नारा बुलंद कर दिया था। वो ना जाने कितनी बार आए और गए। उनके विचार और सहायता कार्यों को अब तक सराहना ही मिली। लेकिन शिल्पा का मतलब है कि हम एहसान-फरामोश निकले। हमारे फायदे के लिए डॉलर ख़र्च करके रिचर्ड गेयर कुछ भी उलूल-जुलूल करने के हक़दार जो बन गए। शिल्पा हमें ज्ञानबोध करा रही हैं। रिचर्ड, हमसे गलती हो गई। अब आप हम पर डॉलर ख़र्च करो और हम आपके नंगापन पर ताली बजा कर आपका कर्ज़ उतारेंगे।
शिल्पा जी, रिचर्ड ने आपसे माफ़ी मांगी या नहीं कोई नहीं जानता। शरीफ़ तो उन्हें हम तब मानते जब वो खुल कर लोगों से इस पर सफ़ाई देते। लेकिन जब मन में चोर बैठा हो तो वो सामने कैसे आएं। आपसे माफ़ी की बात सच मान भी लें तो आपको भले ही इस पर शर्मिंदगी महसूस हुई हो। लेकिन हमें तो शर्म आती है उस पर जो हमने देखा। आपने इसे अपना निजी मामला समझ कर भले ही निपटा दिया। कह दिया कि रिचर्ड को हिन्दी नहीं आती इसलिए बदहवासी में चूमने की भाषा में हमारा मनोरंजन कर रहे थे। लेकिन आपका ये मनगढंत तर्क किसी के गले नहीं उतरा। आपको भले लगता हो कि आपके होठों को न चूमकर रिचर्ड हमारी संस्कृति का मान रख गए। लेकिन संस्कृति तो दूर की बात है रुपहले पर्दे पर सीन देते देते आप तो ये भी भूल गई कि हमारे देश में आज भी इस तरह की ओछी हरकतों की निंदा ही होती है। और अनर्गल तर्कों से इसे जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। आप जिस तरह से अपने राग बदलती हैं उसे देखकर आप भी उतनी ही बड़ी कसूरवार लगती हैं जितना कि रिचर्ड गेयर।





वाह वाह इसे कहते हैं धांसू लेखन। इस घटिया हरकत को सही ठहराने वालों को एकदम सही जवाब दिया आपने। साधुवाद!
ur article is really a good effort to uncover those incident/moment which r against the indian culture, but r being curtained by these famous personality for the sake of their fame n being in media.
Good article. Keep writing your observation. How do you manage when working with channel like Rajat TV
I have found ur article really very balanced one. I may not be entirelly critical abt the kiss controversy but i do believe that you have put you view in a well-fashioned manner. I do believe that Shilpa has done it or got it done to test the public and to taste the immense publicity after Big Brother. I am at the same time very impressed with the flow of the your write-up. Keep writting such bright views.
vineeta singh
it is a good way to show the mirror to the celebrity, who always use to be in news only for publishity
मिस्टेर ओम, आप का लेख पढ़ कर मज़ा आया. लेकिन आप का एक तरफ़ा नज़रिया सूहाया नहीं. जहाँ सब लोग शिल्पा की फ़िगरर के कदरदान हैं वही आप उनसे रुष्ट प्रतीत लगते है. ख़ैर, हम आपको बताना चाहते है की इस्स बार आपने अपनी बात बहुत ही साफ़ और सीधे तरीक़े से रखी है. आपने शिल्पा के तर्क को बिल्कुल ग़लत कर दिया है. वैसे मैं किस इत्यादि चीज़ों को बुरा नहीं मानती किंतु जिस तरह से रिचर्ड ने शिल्पा को भी चौका दिया वो किसी को भी पसंद नहीं आया. आपने इस एपीसोड़े के किसी पेहलू को नज़रअंदाज़ नहीं किया, आपने शिल्पा का भारतीए संस्कृति को मुद्दा बना देने की बात को सही तौर से प्रस्तुत किया है और एह बात बिल्कुल सही है की शिल्पा का तर्क किसी के गले नहीं उतरा. आपकी भाषा में कोई ख़ामिया नहीं है और आपके लेखन में मुश्किल शब्द नहीं है लेकिन प्लीज़ मेरी बात पैर गौर करते हुए शिल्पा के प्रति नाज़ुक रवैया आपना लीजिए. बेचारी अगर कहीं उसने एह पढ़ लिया तो आपसे ख़फा हो जाएगी…लिखते रहिए…
हिन्दी चिट्ठाजगत में कोटिशः स्वागत. बेबाकी से लिखते रहें.
good writing, keep it up
very well written…….
may i ask u a question how can u write so well in hindi n english both… the flow of ur article is too good…. keep writing…..
बहुत ख़ूब,लगे रहिये
बहुत अच्छा लगा इसे पढ़ना। देर से ही सही आपका हिंदी ब्लाग जगत में स्वागत है। नियमित लिखते रहें! बधाई इस लेख के लिये!
ki likhle re bhaywa.It was really a balanced one with having simplicity, no-nonsence words & more importantly enough interest.Really loudable.
[...] *** आपको भले लगता हो कि आपके होठों को न चूमकर रिचर्ड हमारी संस्कृति का मान रख गए। लेकिन संस्कृति तो दूर की बात है रुपहले पर्दे पर सीन देते देते आप तो ये भी भूल गई कि हमारे देश में आज भी इस तरह की ओछी हरकतों की निंदा ही होती है। और अनर्गल तर्कों से इसे जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। आप जिस तरह से अपने राग बदलती हैं उसे देखकर आप भी उतनी ही बड़ी कसूरवार लगती हैं जितना कि रिचर्ड गेयर। [पूरा लेख पढें …] [...]
[...] *** आपको भले लगता हो कि आपके होठों को न चूमकर रिचर्ड हमारी संस्कृति का मान रख गए। लेकिन संस्कृति तो दूर की बात है रुपहले पर्दे पर सीन देते देते आप तो ये भी भूल गई कि हमारे देश में आज भी इस तरह की ओछी हरकतों की निंदा ही होती है। और अनर्गल तर्कों से इसे जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। आप जिस तरह से अपने राग बदलती हैं उसे देखकर आप भी उतनी ही बड़ी कसूरवार लगती हैं जितना कि रिचर्ड गेयर। [पूरा लेख पढें …] [...]
[...] *** आपको भले लगता हो कि आपके होठों को न चूमकर रिचर्ड हमारी संस्कृति का मान रख गए। लेकिन संस्कृति तो दूर की बात है रुपहले पर्दे पर सीन देते देते आप तो ये भी भूल गई कि हमारे देश में आज भी इस तरह की ओछी हरकतों की निंदा ही होती है। और अनर्गल तर्कों से इसे जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। आप जिस तरह से अपने राग बदलती हैं उसे देखकर आप भी उतनी ही बड़ी कसूरवार लगती हैं जितना कि रिचर्ड गेयर। [पूरा लेख पढें …] [...]
ur article r really good, keep it up!!
bhut badhiya… actully tumne sahee lika hai… nischit rup se iske ninda kee janee chayee… keep it up
Cheers
pramod